Monday, 16 July 2018

Hanuman Chalisa pdf in Hindi free Download

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This page will provide you the Hanuman Chalisha in Hindi with pdf download button, you can also read the full Hanuman Chalisa below.

Download Hanuman Chalisa PDF in Hindi





http://www.hindutemplealbany.org/wp-content/uploads/2016/08/Sri_Hanuman_Chalisa_Hindi.pdf

Written Hanuma Chalisha in Hindi

॥दोहा॥


श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥



बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

॥चौपाई॥


जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥१॥



राम दूत अतुलित बल धामा ।

अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥२॥



महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।

कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥३॥



कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।

कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥४॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥५॥


सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।

तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥६॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥७॥


प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।

राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥



सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।

बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥



भीम रूप धरि असुर सँहारे ।

रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥



लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥



रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥



सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥



सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।

नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥



जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥



तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।

राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥



तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।

लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥



जुग सहस्र जोजन पर भानु ।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥



प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥



दुर्गम काज जगत के जेते ।

सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥



राम दुआरे तुम रखवारे ।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥



सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।

तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥



आपन तेज सह्मारो आपै ।

तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥



भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।

महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥



नासै रोग हरै सब पीरा ।

जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥



सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥



सब पर राम तपस्वी राजा ।

तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥



और मनोरथ जो कोई लावै ।

सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥



चारों जुग परताप तुह्मारा ।

है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥



साधु सन्त के तुम रखवारे ।

असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥



अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।

अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥



राम रसायन तुह्मरे पासा ।

सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥



तुह्मरे भजन राम को पावै ।

जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥



अन्त काल रघुबर पुर जाई ।

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥



और देवता चित्त न धरई ।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥



सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥



जय जय जय हनुमान गोसाईं ।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥



जो सत बार पाठ कर कोई ।

छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥



जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।

होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥



तुलसीदास सदा हरि चेरा ।

कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥४०॥ 



॥दोहा॥



पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।

राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

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