Monday, July 30, 2018

Munshi Premchand Quotes in Hindi, English | मुंशी प्रेमचंद के सुविचार

Dhanpat Rai Shrivastava (31 July 1880 – 8 October 1936), better known by his pen name Munshi Premchand was an Indian writer famous for his modern Hindi-Urdu literature. Here we have shared a large collection of Munshi Premchand Quotes which are in Hindi and English. 

Munshi Premchand Quotes in Hindi, English | मुंशी प्रेमचंद के सुविचार

Munshi Premchand Quotes in Hindi

"कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

 गरज वाले आदमी के साथ कठोरता करने में लाभ  है लेकिन बेगरज वाले को दाव पर पाना जरा कठिन है।

"चापलूसी का ज़हरीला प्याला आपको तब तक नुकसान नहीं पहुँचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी न जाएँ।" ~ मुंशी प्रेमचंद

पंच के दिल में खुदा बसता है।

"महान व्यक्ति महत्वाकांक्षा के प्रेम से बहुत अधिक आकर्षित होते हैं।" ~ मुंशी प्रेमचंद

मनुष्य को देखो, उसकी आवश्यकता को देखो तथा अवसर को देखो उसके उपरांत जो उचित समझा, करो।

"जिस साहित्य से हमारी सुरुचि न जागे, आध्यात्मिक और मानसिक तृप्ति न मिले, हममें गति और शक्ति न पैदा हो, हमारा सौंदर्य प्रेम न जागृत हो, जो हममें संकल्प और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने की सच्ची दृढ़ता न उत्पन्न करे, वह हमारे लिए बेकार है वह साहित्य कहलाने का अधिकारी नहीं है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन है, विचार है। जिन्होंने धन और भोग विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया, वो क्या लिखेंगे?

"आकाश में उड़ने वाले पंछी को भी अपने घर की याद आती है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"जिस प्रकार नेत्रहीन के लिए दर्पण बेकार है उसी प्रकार बुद्धिहीन के लिए विद्या बेकार है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"न्याय और नीति लक्ष्मी के खिलौने हैं, वह जैसे चाहती है नचाती है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"युवावस्था आवेशमय होती है, वह क्रोध से आग हो जाती है तो करुणा से पानी भी।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए तो यह उससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।" ~ मुंशी प्रेमचंद

Munshi Premchand Quotes in Hindi, English | मुंशी प्रेमचंद के सुविचार


"देश का उद्धार विलासियों द्वारा नहीं हो सकता। उसके लिए सच्चा त्यागी होना आवश्यक है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"मासिक वेतन पूरनमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"क्रोध में मनुष्य अपने मन की बात नहीं कहता, वह केवल दूसरों का दिल दुखाना चाहता है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अनुराग, यौवन, रूप या धन से उत्पन्न नहीं होता। अनुराग, अनुराग से उत्पन्न होता है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"विजयी व्यक्ति स्वभाव से, बहिर्मुखी होता है। पराजय व्यक्ति को अन्तर्मुखी बनाती है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अतीत चाहे जैसा हो, उसकी स्मृतियाँ प्रायः सुखद होती हैं।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"दुखियारों को हमदर्दी के आंसू भी कम प्यारे नहीं होते।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"मै एक मज़दूर हूँ। जिस दिन कुछ लिख न लूँ, उस दिन मुझे रोटी खाने का कोई हक नहीं।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"निराशा सम्भव को असम्भव बना देती है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"बल की शिकायतें सब सुनते हैं, निर्बल की फरियाद कोई नहीं सुनता।" ~ मुंशी प्रेमचंद

इतना पुराना मित्रता रुपी वृक्ष सत्य का एक झोंका भी न सह सका। सचमुच वह बालू की ही जमीन पर खड़ा था।

"दौलत से आदमी को जो सम्‍मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्‍मान है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

दोस्ती के लिए कोई अपना ईमान नहीं बेचता।

"संसार के सारे नाते स्‍नेह के नाते हैं, जहां स्‍नेह नहीं वहां कुछ नहीं है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

अतीत चाहे जैसा हो, उसकी स्मृतियां प्रायः सूखद होती है।

Munshi Premchand Quotes in Hindi, English | मुंशी प्रेमचंद के सुविचार


"जिस बंदे को पेट भर रोटी नहीं मिलती, उसके लिए मर्यादा और इज्‍जत ढोंग है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।" ~ मुंशी मुंशी प्रेमचंद

"जीवन की दुर्घटनाओं में अक्‍सर बड़े महत्‍व के नैतिक पहलू छिपे हुए होते हैं!" ~ मुंशी प्रेमचंद

जिस तरह सुखी लकड़ी जल्दी से जल उठती है, उसी तरह भूख से बावला मनुष्य जरा जरा सी बात पर तिनक जाता है।

"नमस्‍कार करने वाला व्‍यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अच्‍छे कामों की सिद्धि में बड़ी देर लगती है, पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं।" ~ मुंशी प्रेमचंद

"स्वार्थ की माया अत्यन्त प्रबल है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"केवल बुद्धि के द्वारा ही मानव का मनुष्यत्व प्रकट होता है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"कार्यकुशल व्यक्ति की सभी जगह जरुरत पड़ती है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"दया मनुष्य का स्वाभाविक गुण है।" ~मुंशी प्रेमचंद

"सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता | कर्तव्य~पालन में ही चित्त की शांति है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"नमस्कार करने वाला व्यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अन्याय में सहयोग देना, अन्याय करने के ही समान है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"आत्म सम्मान की रक्षा, हमारा सबसे पहला धर्म है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"मनुष्य कितना ही हृदयहीन हो, उसके ह्रदय के किसी न किसी कोने में पराग की भांति रस छिपा रहता है| जिस तरह पत्थर में आग छिपी रहती है, उसी तरह मनुष्य के ह्रदय में भी ~ चाहे वह कितना ही क्रूर क्यों न हो, उत्कृष्ट और कोमल भाव छिपे रहते हैं|" ~ मुंशी प्रेमचंद

नाटक उस वक्त पसंद होता है, जब रसिक समाज उसे पसंद कर लेता है। बारात का नाटक उस वक्त पास होता है, जब राह चलते आदमी उसे पसंद कर लेते हैं।

"जो प्रेम असहिष्णु हो, जो दूसरों के मनोभावों का तनिक भी विचार न करे, जो मिथ्या कलंक आरोपण करने में संकोच न करे, वह उन्माद है, प्रेम नहीं|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"मनुष्य बिगड़ता है या तो परिस्थितियों से अथवा पूर्व संस्कारों से| परिस्थितियों से गिरने वाला मनुष्य उन परिस्थितियों का त्याग करने से ही बच सकता है|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"चोर केवल दंड से ही नहीं बचना चाहता, वह अपमान से भी बचना चाहता है| वह दंड से उतना नहीं डरता जितना कि अपमान से|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"जीवन को सफल बनाने के लिए शिक्षा की जरुरत है, डिग्री की नहीं| हमारी डिग्री है ~ हमारा सेवा भाव, हमारी नम्रता, हमारे जीवन की सरलता| अगर यह डिग्री नहीं मिली, अगर हमारी आत्मा जागृत नहीं हुई तो कागज की डिग्री व्यर्थ है|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"साक्षरता अच्छी चीज है और उससे जीवन की कुछ समस्याएं हल हो जाती है, लेकिन यह समझना कि किसान निरा मुर्ख है, उसके साथ अन्याय करना है|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"दुनिया में विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई भी विद्यालय आज तक नहीं खुला है|"~ मुंशी प्रेमचंद

"हम जिनके लिए त्याग करते हैं, उनसे किसी बदले की आशा ना रखकर भी उनके मन पर शासन करना चाहते हैं| चाहे वह शासन उन्हीं के हित के लिए हो| त्याग की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, यह शासन भावना उतनी ही प्रबल होती है|"~ मुंशी प्रेमचंद

अज्ञान में सफाई है और हिम्मत है, उसके दिल और जुबान में पर्दा नहीं होता, ना कथनी और करनी में। क्या यह अफसोस की बात नहीं, ज्ञान अज्ञान के आगे सिर झुकाए?

"क्रोध अत्यंत कठोर होता है| वह देखना चाहता है कि मेरा एक~एक वाक्य निशाने पर बैठा है या नहीं| वह मौन को सहन नहीं कर सकता| ऐसा कोई घातक शस्त्र नहीं है जो उसकी शस्त्रशाला में न हो, पर मौन वह मन्त्र है जिसके आगे उसकी सारी शक्ति विफल हो जाती है|"~ मुंशी प्रेमचंद

जीवन एक दीर्घ पश्चाताप के सिवा और क्या है?

"कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सद्व्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुबाब दिखाने से नहीं|"~ मुंशी प्रेमचंद

"सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं|"~ मुंशी प्रेमचंद

वही तलवार, जो केले को नहीं काट सकती। शान पर चढ़कर लोहे को काट देती है। मानव जीवन में आग बड़े महत्व की चीज है। जिसमें आग है वह बूढ़ा भी तो जवान है। जिसमे आग नहीं है, गैरत नहीं, वह भी मृतक है।

नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत दो, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए।

"दौलत से आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है|"~ मुंशी प्रेमचंद

"ऐश की भूख रोटियों से कभी नहीं मिटती| उसके लिए दुनिया के एक से एक उम्दा पदार्थ चाहिए|"~ मुंशी प्रेमचंद

"किसी किश्ती पर अगर फर्ज का मल्लाह न हो तो फिर उसके लिए दरिया में डूब जाने के सिवाय और कोई चारा नहीं|"~ मुंशी प्रेमचंद

"मनुष्य का उद्धार पुत्र से नहीं, अपने कर्मों से होता है| यश और कीर्ति भी कर्मों से प्राप्त होती है| संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है, जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए दी है| बड़ी~बड़ी आत्माएं, जो सभी परीक्षाओं में सफल हो जाती हैं, यहाँ ठोकर खाकर गिर पड़ती हैं|"~ मुंशी प्रेमचंद

"नीतिज्ञ के लिए अपना लक्ष्य ही सब कुछ है| आत्मा का उसके सामने कुछ मूल्य नहीं| गौरव सम्पन्न प्राणियों के लिए चरित्र बल ही सर्वप्रधान है|"~ मुंशी प्रेमचंद

"यश त्याग से मिलता है, धोखाधड़ी से नहीं |" ~ मुंशी प्रेमचंद

आकाश में उड़ने वाले पंछी को भी अपना घर याद आता है।

"जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में हैं, उनका सुख लूटने में नहीं |" ~ मुंशी मुंशी प्रेमचंद

"लगन को कांटों कि परवाह नहीं होती |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"उपहार और विरोध तो सुधारक के पुरस्कार हैं |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"जब हम अपनी भूल पर लज्जित होते हैं, तो यथार्थ बात अपने आप ही मुंह से निकल पड़ती है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"अपनी भूल अपने ही हाथ सुधर जाए तो,यह उससे कहीं अच्छा है कि दूसरा उसे सुधारे |" ~ मुंशी प्रेमचंद

"विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई विद्यालय आज तक नहीं खुला|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"आदमी का सबसे बड़ा दुश्मन गरूर है|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"सफलता में दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है|" ~ मुंशी प्रेमचंद

"डरपोक प्राणियों में सत्य भी गूंगा हो जाता है |" ~ मुंशी प्रेमचंद

अपने उत्तरदायित्व का ज्ञान बहुधा हमारे संकुचित व्यवहारों का सुधारक होता है।

"चिंता रोग का मूल है।" – मुंशी प्रेमचंद

"चिंता एक काली दिवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है, जिसमें से निकलने की फिर कोई गली नहीं सूझती।" – मुंशी प्रेमचंद

चिंता एक काली दीवार की भांति चारों ओर से घेर लेती है। जिसमें से निकलने की कोई गली नहीं है।

चापलूसी का जहरीला प्याला आपको तब तक नहीं नुकसान पहुंचा सकता जब तक कि आपके कान उसे अमृत समझ कर पी ना जाए।

कार्यकुशलता की व्यक्ति को हर जगह जरूरत पड़ती है।

खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है, आगे बढ़ते रहने की लगन का।

दौलतमंद आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है।

जीवन का वास्तविक सुख, दूसरों को सुख देने में है; उनका सुख लूटने में नहीं।

आत्मसम्मान की रक्षा हमारा सबसे पहला धर्म है।

सफलता दोषों को मिटाने की विलक्षण शक्ति है।

यश त्याग से मिलता है, धोखाधड़ी से नहीं।

नमस्कार करने वाला व्यक्ति विनम्रता को ग्रहण करता है और समाज में सभी के प्रेम का पात्र बन जाता है।

कर्तव्य कभी आग और पानी की परवाह नहीं करता, कर्तव्य पालन में ही चित्त की शांति है।

न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं। इन्हें वह जैसे चाहती है, नचाती है।

केवल बुद्धि के द्वारा ही मनुष्य का मनुष्यत्व प्रकट होता है।

स्त्री गालियां सह लेती है, मार भी सह लेती है, पर मायके की निंदा उससे नहीं सही जाती।

अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए, तो यह उससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे।

बूढो के लिए अतीत में सूखो और वर्तमान के दु:खो और भविष्य के सर्वनाश से ज्यादा मनोरंजक और कोई प्रसंग नहीं होता।

सौभाग्य उसी को प्राप्त होता है, जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचलित रहते हैं।

अनाथों का क्रोध पटाखे की आवाज है, जिससे बच्चे डर जाते हैं और असर कुछ नहीं होता।

द्वेष का मायाजाल बड़ी-बड़ी मछलियों को ही फसाता है। छोटी मछलियां या तो उसमें फंसती ही नहीं या तुरंत निकल जाती हैं। उनके लिए वह घातक जाल क्रीडा की वस्तु है, भय का नहीं।

मनुष्य का मन और मस्तिष्क पर भय का जितना प्रभाव होता है, उतना और किसी शक्ति का नहीं। प्रेम, चिंता, हानी यह सब मन को अवश्य दुखित करते हैं; पर यह हवा के हल्के झोंके हैं और भय प्रचंड आधी है।

इंसान का कोई मूल्य नहीं, केवल दहेज का मूल्य है।

Munshi Premchand Quotes in English


Beauty doesn't need ornaments. Softness can't bear the weight of ornaments.

Trust is the first step to love.

What greatness do I have that I have to tell anyone about? I live just like millions of people in this country; I am ordinary. My life is also ordinary. I am a poor school teacher suffering family travails. During my whole lifetime, I have been grinding away with the hope that I could become free of my sufferings. But I have not been able to free myself from suffering. What is so special about this life that needs to be told to anybody?

To be successful in life what you need is education, not literacy and degrees.

The future belongs to the peasants and workers...India cannot remain unaffected by these winds of change...Who had suspected before the Resolution the tremendous might of the exploited peoples of Russia.

The greater the calamity, [he once wrote] the tougher the fibre. It is tragedy that makes a man.



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A passionate blogger who failed many many times in this big blogging industry. Now I am learning Digital Marketing online with the help of Google Digital Unlocked.

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